रीझे यादव की रचनाएँ
रमायण म छत्तीसगढ़ महिमा
फगुनहा बेरा
रमायण म छत्तीसगढ़ महिमा
ये माटी रिसी मुनि के ठउर
गियानी बिधुन होके जप-तप करथे।
सिहावा डोंगरी के सिंगी रिसी ह
जम्मो के आस पूरा करथे।
गियानी बिधुन होके जप-तप करथे।
सिहावा डोंगरी के सिंगी रिसी ह
जम्मो के आस पूरा करथे।
चउंथा पन म राजा दसरथ
लोग-लइका बर तरसथे।
रेंगत आथे जब मुनी तीर
मन के इच्छा पूरा करथे।
लोग-लइका बर तरसथे।
रेंगत आथे जब मुनी तीर
मन के इच्छा पूरा करथे।
ये भुइंया के परताप गजब!
जिंहा कौसिला अस बेटी जनम धरथे।
जेकर पुन्न परभाव ल देख बिधाता!
कोरा म संउहत अवतरथे।
जिंहा कौसिला अस बेटी जनम धरथे।
जेकर पुन्न परभाव ल देख बिधाता!
कोरा म संउहत अवतरथे।
ये माटी के संस्कार अतिक!
लइका ल मरयादा सिखाथे
दाई-ददा के मान रखे बर बेटा!
हाँसत-हाँसत बन जाथे।
लइका ल मरयादा सिखाथे
दाई-ददा के मान रखे बर बेटा!
हाँसत-हाँसत बन जाथे।
इही धरती म दाई के मया!
सबरी रुप म पलपलाथे
छप्पन भोग खाने वाला ल
जूठा बोईर घातेच भाथे।
सबरी रुप म पलपलाथे
छप्पन भोग खाने वाला ल
जूठा बोईर घातेच भाथे।
मया के मोल तोल न कोई
सबरी भक्तिन ह सिखाथे।
कांदा-कूसा बोईर के बदला
नवधा भक्ति के बर पाथे।
सबरी भक्तिन ह सिखाथे।
कांदा-कूसा बोईर के बदला
नवधा भक्ति के बर पाथे।
बनवास मिलिस सीता ल जब
इही भुइंया ह पोटारे हे।
जगतजननी मिथिलाकुमारी ल
बालमीक आसरम म लाने हे।
इंहे जनमिन लव अउ कुस
अवधपुरी के चिन्हारी।
मरयादा पुरुस राम के लइका
जेकर महिमा बडभारी!
इही भुइंया ह पोटारे हे।
जगतजननी मिथिलाकुमारी ल
बालमीक आसरम म लाने हे।
इंहे जनमिन लव अउ कुस
अवधपुरी के चिन्हारी।
मरयादा पुरुस राम के लइका
जेकर महिमा बडभारी!
जब ले रितु बसंत आये हे
परसा बड मुस्कावत हे।
लाल-बरन अंगरा कस लागे
बिरही जीव ल जरावत हे।
परसा बड मुस्कावत हे।
लाल-बरन अंगरा कस लागे
बिरही जीव ल जरावत हे।
मटकत सेम्हर अउ धंवई फूल
परसा के संग मेछरावत हे।
बिन ओनहा लाज के मारे
मउहा बिकट लजावत हे।
परसा के संग मेछरावत हे।
बिन ओनहा लाज के मारे
मउहा बिकट लजावत हे।
दुलहा बरोबर आमा लागे
सुग्घर मउर सजावत हे।
बिधुन होके कोइली नाचत हे।
भोंगर्रा मोहरी बजावत हे।
सुग्घर मउर सजावत हे।
बिधुन होके कोइली नाचत हे।
भोंगर्रा मोहरी बजावत हे।
सुवा पांखी लुगरा बरोबर
सरई के पाना लागत हे।
कोसुम के हरियर लाली डारा
घातेच मन ल भावत हे।
सरई के पाना लागत हे।
कोसुम के हरियर लाली डारा
घातेच मन ल भावत हे।
परकिरती के आनी- बानी रंग
हमला अगुवा के चेतावत हे।
मया के रंग सकेले राहव
थोरिक दिन म फागुन आवत हे।
हमला अगुवा के चेतावत हे।
मया के रंग सकेले राहव
थोरिक दिन म फागुन आवत हे।
नवा साल म
झन होवय कोनो अलहन
मनखे मनखे राहय
झन बिगडे गडहन ।
नवा साल म
संसो सबके सिराय
बिगडे काज बनय
सुख-संपत्ति सकलाय।
नवा साल म
कोनो बैरी झन होवे
मया के पीकी फूटे
सुमत के बिजहा बोंवे।
नवा साल म
करिया धन सपडाय
उंकर बइमानी म
गरीबहा झन पेराय।
नवा साल म
परोसी ल बुध आय
पर के भरोसा म
जादा झन इतराय।
नवा साल म
मंहगई मर जाय
खात-खवई कर देबो
चाहे कतको खरचा आय।
झन होवय कोनो अलहन
मनखे मनखे राहय
झन बिगडे गडहन ।
नवा साल म
संसो सबके सिराय
बिगडे काज बनय
सुख-संपत्ति सकलाय।
नवा साल म
कोनो बैरी झन होवे
मया के पीकी फूटे
सुमत के बिजहा बोंवे।
नवा साल म
करिया धन सपडाय
उंकर बइमानी म
गरीबहा झन पेराय।
नवा साल म
परोसी ल बुध आय
पर के भरोसा म
जादा झन इतराय।
नवा साल म
मंहगई मर जाय
खात-खवई कर देबो
चाहे कतको खरचा आय।
गौ-दुर्दशा
धर्म-धरा भारतभूमि पर
कैसा दुर्दिन आया भइया!
द्वार पर याचक सी खडी
हमारी जननी गऊ मइया!!
कैसा दुर्दिन आया भइया!
द्वार पर याचक सी खडी
हमारी जननी गऊ मइया!!
भूल गये हम अपनी संस्कृति
श्री कृष्ण गौ चारण करते थे
गीता-ज्ञान दाता गोपाल कभी
हस्त लकुटी,अधरों पे बंशी धरते थे।
श्री कृष्ण गौ चारण करते थे
गीता-ज्ञान दाता गोपाल कभी
हस्त लकुटी,अधरों पे बंशी धरते थे।
स्मरण रहे जब रावण ने
धरा पर अत्याचार मचाई थी
गौ-रूप में धरती माता ने
प्रभु तक पीडा पहुंचाई थी!
धरा पर अत्याचार मचाई थी
गौ-रूप में धरती माता ने
प्रभु तक पीडा पहुंचाई थी!
गऊ साक्षात कामधेनु है
हर इच्छा पूरी कर देती है।
क्षीर सुधा सम देती है
तन-मन की पीर हर लेती है।
हर इच्छा पूरी कर देती है।
क्षीर सुधा सम देती है
तन-मन की पीर हर लेती है।
वर्तमान में श्वान युवराज बना है
निज पुत्र सा पालन पाता है।
करुणा और ममता की प्रतिमा
गौ माता घर-घर दुत्कारा जाता है।
निज पुत्र सा पालन पाता है।
करुणा और ममता की प्रतिमा
गौ माता घर-घर दुत्कारा जाता है।
रीझे-टेंगनाबासा
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