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Sunday, 26 February 2017

ग़ज़ल
 
हसरतें थी कभी साथ ही हम रहे
क्यों तभी खामखां ये गिले हो गए..
दूरियां हो गई हमकदम ना रहे
आज ही ये सभी फैसले हो गए..
वक़्त के मार से बदलना ही पड़ा
आज ही खत्म सब सिलसिले हो गए..
छोड़ने का मुझे ले लिया फैसला
बेकदर बेवफा मनचले हो गए..
आसमाँ कर रहा दर्द को बारिशें
यूँ लगे आँसु भी जलजले हो गए..
जिंदगी खत्म हो अब यही बेहतर
यार अब पस्त सब हौसले हो गए....
           देवेन्द्र कुमार ....

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