शिक्षक दिवस विशेष
आपके पदचिन्हो के पिछे-पिछे,
आजीवन चलता जाऊँगा ।
आजीवन चलता जाऊँगा ।
जो राह दिखाई है आपने,
मैं औरो को दिखलाऊंगा ।
मैं औरो को दिखलाऊंगा ।
सुखी डाली को हरियाली,
बेजान को जीवनदान दिया ।
बेजान को जीवनदान दिया ।
काले अंधियारे जीवन को,
सौ सूरज से धनवान किया ।
सौ सूरज से धनवान किया ।
कान पकड़ उठक-बैठक,
थी छड़ियो की बरसात हुई ।
थी छड़ियो की बरसात हुई ।
समझ न पाया उस क्षण मै,
अनुशासन की शुरूवात हुई ।
अनुशासन की शुरूवात हुई ।
जीवन को चलते रहना है,
लौ इसकी झिलमिल जलती है ।
लौ इसकी झिलमिल जलती है ।
जीवन के हर चौराहो पर,
बस कमी तुम्हारी खलती है ।
बस कमी तुम्हारी खलती है ।
रचना - युवा कवि-लक्की गुप्ता
मुड़ागाँव (छुरा)गरियाबँद
मुड़ागाँव (छुरा)गरियाबँद
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