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Tuesday, 6 September 2016

शिक्षक दिवस विशेष

आपके पदचिन्हो के पिछे-पिछे,
आजीवन चलता जाऊँगा ।

जो राह दिखाई है आपने,
मैं औरो को दिखलाऊंगा ।

सुखी डाली को हरियाली,
बेजान को जीवनदान दिया ।

काले अंधियारे जीवन को,
सौ सूरज से धनवान किया ।

कान पकड़ उठक-बैठक,
थी छड़ियो की बरसात हुई ।

समझ न पाया उस क्षण मै,
अनुशासन की शुरूवात हुई ।

जीवन को चलते रहना है,
लौ इसकी झिलमिल जलती है ।

जीवन के हर चौराहो पर,
बस कमी तुम्हारी खलती है ।

रचना - युवा कवि-लक्की गुप्ता
मुड़ागाँव (छुरा)गरियाबँद

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