गाँव म बिकास होवत हे
आजो घलो ए बात मोला खलत हे
गांव के संसकिरिति आँय बाँय चलत हे
लाज शरम मरयादा सबो सुतत हे
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
गांव के संसकिरिति आँय बाँय चलत हे
लाज शरम मरयादा सबो सुतत हे
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
लोग लइका के संसकार बदलगे,
छोटे बड़े ल नइ जाने ।
दाई ददा के मरयादा ल,
चिखला कस साने।
आज के बचपन कोन डाहन जावत हे
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
दाई ददा के मरयादा ल,
चिखला कस साने।
आज के बचपन कोन डाहन जावत हे
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
बेटा बहू के चाल चलन म,
परवार के नेंव खलप गे।
देख करनी दूनो परानी के,
महतारी के आतमा कलप गे।
परवार के नेंव खलप गे।
देख करनी दूनो परानी के,
महतारी के आतमा कलप गे।
माथा ल धरके दाई ददा ,दूनो झन रोवत हे
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
इसकूल के हाल छोड़ मनखे,
जुआ सट्टा के हिसाब राखत हे।
हो जाए कोनो करा जुगाड़ कहिके,
दूसर के मुहू ल ताकत हे।
जुआ सट्टा के हिसाब राखत हे।
हो जाए कोनो करा जुगाड़ कहिके,
दूसर के मुहू ल ताकत हे।
गांव के लीम चांवरा ल,जुआखाना बनावत हे
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
तीज़ तिहार के ठिकाना नइ हे,
मंद मऊहा म सनाए हे।
बात बात म लड़ई होके,
मुहु कान ह चनाए हे।
मंद मऊहा म सनाए हे।
बात बात म लड़ई होके,
मुहु कान ह चनाए हे।
एक कप पी के, तिहार ल मनावत हे
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
नर नियाव के तो ठिकाना नइ हे,
सिधवा के घेरी बेरी पेसी हे।
लबरा चोरहा नियाव पागे,
काबर ओकर घर अंगरेजी सन देसी हे।
सिधवा के घेरी बेरी पेसी हे।
लबरा चोरहा नियाव पागे,
काबर ओकर घर अंगरेजी सन देसी हे।
आँखि म चेंदरी बांधे,बेवस्था ह चलत हे
मनखे काहत हे- "मोर गांव म विकास होवत हे"
मनखे काहत हे- "मोर गांव म विकास होवत हे"
अइसने बिकास होही,
त ओ गांव के का होही।
जनता करय कछु नही,
मुड़ धरके सबो रोही।
त ओ गांव के का होही।
जनता करय कछु नही,
मुड़ धरके सबो रोही।
आहि सुमत कहिके सबो,सपना ल संजोवत हे,
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
मनखे काहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
डोकरा के होस् अउ छोकरा के जोस,
मिलके जब आगू बढ़ही।
त निसचित हे एकात कनि,
परिवरतन ल आना परही।
मिलके जब आगू बढ़ही।
त निसचित हे एकात कनि,
परिवरतन ल आना परही।
सबो झन सुमत म ले दे के जुरियावत हे
मनखे कहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
मनखे कहत हे- "मोर गांव म बिकास होवत हे"
रचना - विनोद यादव
पंडरीपानी लोहझर
गरियाबंद 36गढ़
पंडरीपानी लोहझर
गरियाबंद 36गढ़
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