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Tuesday, 6 September 2016

सरसती गनेस तुंहर आरती उतारंव

सरसती गनेस ,तुंहर आरती उतारंव ।....2
हर लेव कलेस, तुंहर पांव मै पखारंव ।...2

फूलपान दूबी धरके,थारी सजावंव ।
गुलाल बंदन चंदन के,टीका लगावंव ।
नरियर गुर  लड्डू के, भोग चढ़ावंव।
आरती ऊतार के...2,अपन माथ नवांवव।
सरसती गनेस ,तुंहर आरती उतारंव ।....2
हर लेव कलेस, तुंहर पांव मै पखारंव ।...2

मैं हर आवंव तुंहर,नानकुन लइका।
ग्यान अऊ बुद्धि नईहे,नईहे पइसा ।
बिपती म परके तुंहर ,सरन म परेहंव।
मोर पीरा ल दाई...2 दुरिहा खेदारव।
सरसती गनेस ,तुंहर आरती उतारंव ।....2
हर लेव कलेस, तुंहर पांव मै पखारंव ।...2

सुख संमपति भंडार भरे,आसीस देवव।
ग्यान,मान,सम्मान मिले,आसीस देवव।
दाई-ददा के सेवा करंव अऊ,तुंहर गुन गावंव।
घीव अऊ कपूर के दाई...2 दिया मैं जलावंव।
सरसती गनेस ,तुंहर आरती उतारंव ।....2
हर लेव कलेस, तुंहर पांव मै पखारंव ।...2

रचना-हीरालाल गुरुजी
छुरा जिला गरियाबंद

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