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Tuesday, 6 September 2016

मनखे काबर मुंहलुकवा होगे

आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे ।
रात करियाकर बिहाने सुकवा होगे।
आज मनखे............

लइका होय ,सियान होय,
बुढ़वा होय, सग्यान होय,
बैइरी होय, मितान होय,
सबके काया सुगसुगहा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।

करजा म लदाय होय,
नउकरी म बंधाय होय।
निसा ल चढ़ाय होय,
सबके मन ह घुरघरहा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।

रात करथे चोरी हारी,
दिन करथे भ्रस्टाचारी।
दिनरात करथे चुकली चारी,
सबके आंखी ह घुघवा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।

रचना- हीरालाल गुरूजी"समय"
छुरा जिला गरियाबंद

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