मनखे काबर मुंहलुकवा होगे
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे ।
रात करियाकर बिहाने सुकवा होगे।
आज मनखे............
रात करियाकर बिहाने सुकवा होगे।
आज मनखे............
लइका होय ,सियान होय,
बुढ़वा होय, सग्यान होय,
बैइरी होय, मितान होय,
सबके काया सुगसुगहा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।
बुढ़वा होय, सग्यान होय,
बैइरी होय, मितान होय,
सबके काया सुगसुगहा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।
करजा म लदाय होय,
नउकरी म बंधाय होय।
निसा ल चढ़ाय होय,
सबके मन ह घुरघरहा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।
नउकरी म बंधाय होय।
निसा ल चढ़ाय होय,
सबके मन ह घुरघरहा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।
रात करथे चोरी हारी,
दिन करथे भ्रस्टाचारी।
दिनरात करथे चुकली चारी,
सबके आंखी ह घुघवा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।
दिन करथे भ्रस्टाचारी।
दिनरात करथे चुकली चारी,
सबके आंखी ह घुघवा होगे।
आज मनखे काबर मुंहलुकवा होगे।
रचना- हीरालाल गुरूजी"समय"
छुरा जिला गरियाबंद
छुरा जिला गरियाबंद
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