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Tuesday, 6 September 2016

पइसा कमाय बर सीख

गरीब हस त का होइस,अमीर असन दिख ।
कलजुग म जीना हे तब,पइसा कमायबर सीख ।

बनी कर बिगारी कर,चलाकी कर हुसयारी कर।
हिजगा कर चारी कर,सिरतोन कर लबारी कर।
काम बुता बेपार जम्मो ,राहय अड़बड़ निक।
कलजुग म जीना हे तब,पइसा कमायबर सीख ।

बड़हर घर बिहाव कर,मनखे देखके नियाव कर।
दाइज के चिन्हाव कर,अपन चीज के हियाव कर।
कारी ,गोरी, मोठबर,फोकटिया झिन पइसा म बिक।
कलजुग म जीना हे तब,पइसा कमायबर सीख।

नेता होय, सरकार होय,नत्ता होय परिवार होय।
नउकरी होय बेपार होय,सुबिचार होय बेवहार होय।
सहर, गांव ,खेत-खार कोन्हो बिषय बर लिख।
कलजुग म जीना हे तब,पइसा कमायबर सीख ।

गरब कर गुमान कर,जांगर टोर कि अराम कर।
अकल कर धियान कर,अपन कर कि बिरान कर।
दुख-सुख तीजतिहार म,मांगे झिन परय भीख।
कलजुग म जीना हे तब,पइसा कमायबर सीख।

गरीब हस त का होइस,अमीर असन दिख ।
कलजुग म जीना हे तब,पइसा कमायबर सीख ।

रचना-हीरालाल गुरुजी "समय"
छुरा जिला गरियाबंद

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