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Wednesday, 31 August 2016

गुरुकुल ह इस्कूल बनगे

गुरुकुल ह इस्कूल बनगे,
रद्दा भुलागे सिक्छा।
सिस्यमन आगू बढ़त हे,
बिना देवाय परिच्छा।

राम-कृष्ण गुरुकुल जाके,
गुरु ले पाईन सिक्छा।
जग म ऊँखर पूजा होवथे,
कथा चलत हे अच्छा।

धनुरधारी बनेबर अर्जुन,
आँखी म मारिस तीर।
युधिष्ठीर भीम घलो सबल,
गुरु ह बनाइस बीर।

चाणक्य कर जाके चंन्द्रगुप्त,
देशभक्ति के सिक्छा पाईस।
अखंड भारत बनाके ओहा,
जग म नाव अपन कमाईस।

"समय" बदल गे, नीत बदल गे,
बदल गे सिक्छा के अधिकार।
सकल बिकास के नारा बदलगे,
गुरु अऊ सिक्छा होगे बेकार।

गुरु के पाँव परे बर आज,
चेला ल लाज आवथे।
गुरु-चेला के नत्ता गोत्ता,
एकरे सेती दुरिहावथे।

गुरुपुन्नी अब टीचरडे बनगे,
सर ह आज पूजाथे।
सरकार से बिनती हे सोचय,
सिक्छा कोन कोती जाथे।

रचना- हीरालाल गुरुजी"समय"
छुरा जिला - गरियाबंद

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