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Sunday, 26 June 2016

बेटी बचाआे

बेटी आई, बेटी आई
जीवन में खुशहाली लाई
दाे कुलाे को तारने आई
माता-पिता की दुलारी आई
जीवन का संदेशा लाई
मातृ अस्तित्व को बचाने आई|
ममता का खजाना लाई
सबका दुःख-दर्द बाटने आई
भईया की बहना आई
खुशियो की सौगात लाई
वक्त आया हुई बेटी पराई
अंखियां बाबुल की भर आई
पैदा करने से क्यों डरते हो भाई
बेटी ने दाे कुल की मान बढ़ाई
बेटी ही जीवन है भाई
बेटी ने कुल आगे बढ़ाई
बदलेगी तस्वीर देश की
बेटी भी करेगी अब खुब पढ़ाई
बहेगी विकास की गंगा अब
बेटी हरक्षेत्र में है आगे आई

रचनाकार -नेमीचंद साहू
ग्राम - देवगांव
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)

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