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Friday, 24 June 2016

ये छत्तीसगढ़ हमर ए

जब ले हमर छत्तीसगढ़ फरे हे
ये परदेसिया मन अंगरा-कस जरे हे
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो जगा
एखरे झंडा गड़े हे। जब ले....

सोचव अइसे काबर होईस
गुनव एमन ल कोन बोईस
खोजव एखर ऊलहोय के कारन
काबर कि करना हे एखर निवारन
अब कइसे एमन हमर खोली म बरे हे, जब ले--

हमन छत्तीसगढ़िया सिधवा-अडहा
नई जानेन ईखर अंतस के कड़हा
पहुना मान के एमन ल पूजेन
फूल धरा के हमन कांटा खुंदेन
अब तो इही मन घुना-कीरा कस भरे हे, जब ले..

उठव जहुरिया, जागव गा किसान
एमन जब्बर बैरी ये, नोहय गा मितान
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो जगा छावव
ये लुटईया परदेसिया मन ला ठेंगा देखावव
अब तो हमरो नजर एखर कनिहा म गड़े हे, जब ले--

अब हमरो लईका ह जूझ के पढ़थे
अनपढ़ घलो पिरीत हूनर ले गढ़थे
अब दिन गिनलौ बने ढंग ले जान के
इहां के पानी ल पीयौ बने छान के, ये परदेसी हो...

अब तूंहर हंडिया म जहूर-महुरा बन झरे हे,
जब ले हमर छत्तीसगढ़ फरे हे
ये परदेसिया मन अंगरा-कस जरे हे,
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो-जगा, एखरे झंडा गड़े हे।

रचनाकार - ललित वर्मा
ग्राम - छुरा
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)

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