ये छत्तीसगढ़ हमर ए
अब तूंहर हंडिया म जहूर-महुरा बन झरे हे,
जब ले हमर छत्तीसगढ़ फरे हे
ये परदेसिया मन अंगरा-कस जरे हे
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो जगा
एखरे झंडा गड़े हे। जब ले....
ये परदेसिया मन अंगरा-कस जरे हे
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो जगा
एखरे झंडा गड़े हे। जब ले....
सोचव अइसे काबर होईस
गुनव एमन ल कोन बोईस
खोजव एखर ऊलहोय के कारन
काबर कि करना हे एखर निवारन
अब कइसे एमन हमर खोली म बरे हे, जब ले--
गुनव एमन ल कोन बोईस
खोजव एखर ऊलहोय के कारन
काबर कि करना हे एखर निवारन
अब कइसे एमन हमर खोली म बरे हे, जब ले--
हमन छत्तीसगढ़िया सिधवा-अडहा
नई जानेन ईखर अंतस के कड़हा
पहुना मान के एमन ल पूजेन
फूल धरा के हमन कांटा खुंदेन
अब तो इही मन घुना-कीरा कस भरे हे, जब ले..
नई जानेन ईखर अंतस के कड़हा
पहुना मान के एमन ल पूजेन
फूल धरा के हमन कांटा खुंदेन
अब तो इही मन घुना-कीरा कस भरे हे, जब ले..
उठव जहुरिया, जागव गा किसान
एमन जब्बर बैरी ये, नोहय गा मितान
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो जगा छावव
ये लुटईया परदेसिया मन ला ठेंगा देखावव
अब तो हमरो नजर एखर कनिहा म गड़े हे, जब ले--
एमन जब्बर बैरी ये, नोहय गा मितान
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो जगा छावव
ये लुटईया परदेसिया मन ला ठेंगा देखावव
अब तो हमरो नजर एखर कनिहा म गड़े हे, जब ले--
अब हमरो लईका ह जूझ के पढ़थे
अनपढ़ घलो पिरीत हूनर ले गढ़थे
अब दिन गिनलौ बने ढंग ले जान के
इहां के पानी ल पीयौ बने छान के, ये परदेसी हो...
अनपढ़ घलो पिरीत हूनर ले गढ़थे
अब दिन गिनलौ बने ढंग ले जान के
इहां के पानी ल पीयौ बने छान के, ये परदेसी हो...
अब तूंहर हंडिया म जहूर-महुरा बन झरे हे,
जब ले हमर छत्तीसगढ़ फरे हे
ये परदेसिया मन अंगरा-कस जरे हे,
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो-जगा, एखरे झंडा गड़े हे।
ये परदेसिया मन अंगरा-कस जरे हे,
सरकार-बेपार-सहकार जम्मो-जगा, एखरे झंडा गड़े हे।
रचनाकार - ललित वर्मा
ग्राम - छुरा
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
ग्राम - छुरा
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
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