"दुलरवा बेटा बिगड़गे"
येदे ल अइसे करदे बेटा कि के दाई कहात हे त
आज टेस्ट हे कि के ओखरे बर खखवात हे
दाई-ददा के कमई म टुरा बड़ इतरात हे,
कुछू नइ कमात हे अउ बड़ मजा ऊड़ात हे|
कुछू नइ कमात हे अउ बड़ मजा ऊड़ात हे|
घर ले हीरो बन के जाथे अउ हिराेइन मन ल घुमात हे
जेला निही तेला खवाथे अउ अब्बड़ रहीसी देखात हे,
जेला निही तेला खवाथे अउ अब्बड़ रहीसी देखात हे,
जेब म पइसा नइए त बाप के नाम लिखवात हे
किस्त में गाड़ी ल उठात हे अउ सबाे ल नगद बतात हे,
दाई-ददा ह मर-मर के गाड़ी के किस्त ल पटात हे
दाई-ददा ह मर-मर के गाड़ी के किस्त ल पटात हे
टुरा ह गाड़ी ल बड़ कुदात हे अउ टूरी मन ल घुमात हे,
गाँव के मनखे पुछथे ता त कॉलेज जाथाै बतात हे
गाँव के मनखे पुछथे ता त कॉलेज जाथाै बतात हे
जिहां बाप नई गेहे तिहा-तिहा जात हे,
देवता-धामी घलाे म टुरी ल घुमात हे
देवता-धामी घलाे म टुरी ल घुमात हे
राेज रात-रात ले घर आत हे
पुछत हे त टयूशन बतात हे,
येदे ल अइसे करदे बेटा कि के दाई कहात हे त
आज टेस्ट हे कि के ओखरे बर खखवात हे
पुस्तक ल खाेलके माेबाइल म चुपे-चुप गाेठियात हे,
येला देख दाई ह ददा ल टूरा बने पढ़त हे कि के बतात हे
येला देख दाई ह ददा ल टूरा बने पढ़त हे कि के बतात हे
भईया-भईया कि के सबाे तीर म ओधियात हे,
कॉलेज के बात ल बता कि के खाेधियात हे
कॉलेज के बात ल बता कि के खाेधियात हे
मया के बात ल गाँव के टूरी-टूरा ल सुनात हे,
येला सुन के बने-बने मन घलाे बिगड़ जात हे
येला सुन के बने-बने मन घलाे बिगड़ जात हे
बाप ह बेटा ल अब्बड़ समझात हे,
मया के चक्कर म सब पछतात हे
मया के चक्कर म सब पछतात हे
जे बेटी-बेटा पढ़ाई-लिखई म मन लगात हे,
उही आज डॉक्टर, कलेक्टर, इन्जीनियर बन जात हे
उही आज डॉक्टर, कलेक्टर, इन्जीनियर बन जात हे
रचनाकार - नेमीचंद साहू
ग्राम - देवगाँव (छुरा)
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
ग्राम - देवगाँव (छुरा)
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
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