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Monday, 27 June 2016


"सुन्दर रुप हमर भुईंया के"

सुन्दर रूप हमर भुईंया के हरियाली के
ये तो चिन्हा हरे हमर खुसयाली के
सब जंगल दिन दिन जब अइसने कटाहीं
सब ला सिरा दिही ता इहा काला बचाही

जंगल  कतको जंगली जानवर के निवास ये
रुख के खाँधा मा चिरई चिरगून के वास हे
जब इकर मन के घर हा अइसने छिनाही
ता गुनव ऐ परानी मन हा सब कहाँ जाही

पेड़ करिया बादर ला अपन डाहर बुलाथे
चलथे हवा ताहन सुग्घर राग सुनाथे
रुख-राई तो हमर भुईंया के सिंगार ये
रुख नई रही ता बरसा कहाँ ले आही

जगा-जगा नवा-नवा कारखाना खुलत हे
बरत हे चिमनी करिया धुँआ उड़त हे 
का मजाल मनखे एखर मारे बने जीये सकय
परे हे कचरा जतर-खतर नाली बजबजाही

रंग-रंग के दवई तभो खेत परिया परत हे
नई बाचय फसल बिमारी म मरत हे
उपज बढाए के फेर म सब बिगड़ गे
ऐ धरती अइसन म अऊ कतका उपजाही

भुईंया के कोरा गड़े जिनिस ला खनके
गोठ सब डाहर अब्बड़ हे अवैध खनन के
गलत उपयोग होवत हे सब संसाधन के
फेर कहाँ मिलहि ऐहा जेन एक घंव सिराही

बरसात म घनघोर बरसा सबला बोहाही
जाड़ म अइठे सब जब्बर घाम म भूँजाही
सब खेल करे प्रकृति संग रही रही के
बेरा-बेरा म वहु तो अपन रंग खच्चित देखाही

जगा जगा सुखा ताहन जगा जगा बाढ़
धरती हा कांपही बिजली गिरही ठाढ़
नई बाचय कोनो  कतको उदीम कर ले
माटी मा उपजे हे तेन माटी म हमाही

अभी घलो समय हे रक्छा करौ परयावरन के
रूप ल बदल दौ अपन तीर के वातावरण के
परदुसन ले पार पाये जम्मो उदीम लगावव
किरिया खावव हर अब आदमी रुख लगाही

आवव मिलजुल के  ऐ जतन करथन
रुख लगाए के काम सब झन करथन
जब एक घंव फेर ऐ धरती हरियाही
सिरतोन फेर सब तनी खुसयाली छाही
                           रचना
             देवेन्द्र कुमार ध्रुव (डी आर)
                फुटहा करम बेलर
            जिला गरियाबंद (छ ग)
                9753524905

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