"दुलौरिन बेटी"
मोर दुलौरिन बेटी तेहां
मोर अंगना के चिरईया ओ ...
एक दिन तेहा ,उडी -उडी जाबे
मोर घर म फुदकैया ओ .....।
मोर अंगना के चिरईया ओ ...
एक दिन तेहा ,उडी -उडी जाबे
मोर घर म फुदकैया ओ .....।
1.तही होथस मोर घर के लछमी .
काली सगा तै ,बन जाबे ..
पर के पुतुर संग ,जोर के बंधना
अपन -बिरान ,तै बन जाबे ...
जीहां रबे तै मोर दुलौरिन .....
प्रेम के बन अमरैय्या ओ ..एक दिन
काली सगा तै ,बन जाबे ..
पर के पुतुर संग ,जोर के बंधना
अपन -बिरान ,तै बन जाबे ...
जीहां रबे तै मोर दुलौरिन .....
प्रेम के बन अमरैय्या ओ ..एक दिन
2.बड़ सुरता आही रे मोला
ननपन के तोर ,बोली हा ...
छिन म रोवस ,छिन म हांसस ,
गुरतुर हांसी, ठिठोली हा ...
कइसे बिदा तोला ,करबो नोनी ...
डेरोठी हमर महकैय्या ओ ..एक दिन
ननपन के तोर ,बोली हा ...
छिन म रोवस ,छिन म हांसस ,
गुरतुर हांसी, ठिठोली हा ...
कइसे बिदा तोला ,करबो नोनी ...
डेरोठी हमर महकैय्या ओ ..एक दिन
3.घर -संसार ह सुन्ना होही ,
तोर बिदा के बेरा ओ
रो - रो के तोर ,दाई करही
तोर दुलौरिन जोरा ओ ....
भैया मन हा ,फफखही नोनी ..
संग म हसैय्या ,रोवैय्या ओ ...एक दिन
तोर बिदा के बेरा ओ
रो - रो के तोर ,दाई करही
तोर दुलौरिन जोरा ओ ....
भैया मन हा ,फफखही नोनी ..
संग म हसैय्या ,रोवैय्या ओ ...एक दिन
4.जाबे बेटी ,दूर देस म ...
उहचो ला चहकाबे ओ ,
तोर पिरीत, बेवहार ले नोनी
अंगना ल ,ममहाबे ओ ....
दाई -ददा के मान ल रखबे ...
उहचो ला चहकाबे ओ ,
तोर पिरीत, बेवहार ले नोनी
अंगना ल ,ममहाबे ओ ....
दाई -ददा के मान ल रखबे ...
नइये कोनो ,समझैय्या ओ ...
एक दिन तेहा ,उडी-उडी जाबे ,
मोर घर म फुदकैया ओ ...मोर दुलौरिन
एक दिन तेहा ,उडी-उडी जाबे ,
मोर घर म फुदकैया ओ ...मोर दुलौरिन
रचना - धनराज साहू ,बागबाहरा
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