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Monday, 27 June 2016

"दुलौरिन बेटी"

मोर दुलौरिन बेटी तेहां
मोर अंगना के चिरईया ओ ...
एक दिन तेहा ,उडी -उडी जाबे
मोर घर म फुदकैया ओ .....।

1.तही होथस मोर घर के लछमी .
     काली सगा तै ,बन जाबे ..
   पर के पुतुर संग ,जोर के बंधना
     अपन -बिरान ,तै बन जाबे ...
जीहां रबे तै मोर दुलौरिन .....
प्रेम के बन अमरैय्या ओ ..एक दिन

2.बड़ सुरता आही रे मोला
     ननपन के तोर ,बोली हा ...
छिन म रोवस ,छिन म हांसस ,
     गुरतुर हांसी, ठिठोली हा ...
कइसे बिदा तोला ,करबो नोनी ...
   डेरोठी हमर महकैय्या ओ ..एक दिन

3.घर -संसार ह सुन्ना होही ,
     तोर बिदा के बेरा ओ
  रो - रो के तोर ,दाई करही
      तोर दुलौरिन जोरा ओ ....
भैया मन हा ,फफखही नोनी ..
  संग म हसैय्या ,रोवैय्या ओ ...एक दिन

4.जाबे बेटी ,दूर देस म ...
उहचो ला चहकाबे ओ ,
तोर पिरीत, बेवहार ले नोनी
  अंगना ल ,ममहाबे ओ ....
दाई -ददा के मान ल रखबे ...
   नइये कोनो ,समझैय्या ओ ...
एक दिन तेहा ,उडी-उडी जाबे ,
मोर घर म फुदकैया ओ ...मोर दुलौरिन

रचना - धनराज साहू ,बागबाहरा

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