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Monday, 27 June 2016

गुरुकुल होगे ईसकूल
बियंग

नानचन लईका
बड़े जान बस्ता लादे हे
कई घंव तो बपुरा
रेंगते रेंगत पादे हे
धियान हे रंधनी कोती
मनटोरा आज का रांधे हे
आधा ला पोरसत हे
आधा ला गठरी बांधे हे
अऊ मनटोरा के खोपा मे
गुरुजी हा खोंचत हे फूल
का करबे संगवारी
अब गुरुकुल होगे ईसकूल

लईका के पहिली
गुरुजी ला खाना हे
बाहिर डाहर खुल्ला मे
अब कोई ला नई जाना हे
पांच ला हे खवाना
अऊ पंदरा बताना हे
अब कइसे करबे भैया
साहब बर घलो बचाना हे
कोन जनी कबले हमर
ब्यव्स्था होगे ढूल-मूल
का करबे संगवारी
अब गुरुकुल होगे ईसकूल

गुरुजी हा लईका ला
अब मार नई सकय
गारी देके घलो ओहा
अब सुधार नई सकय
जाती धरम के नाव लेके
अब पुकार नई सकय
कोनहो सरकारी बुता ला
अब नकार नई सकय
गुरुजी के हाथ बांध के
करे हन बडका हमन भूल
का करबे संगवारी
अब गुरुकुल होगे ईसकूल

फोटू देखा-देखा के
लईका ला पढाना हे
फैल होय ते पास होय
आघू कक्छा बढाना हे
सब जानत हो भैया
अंग्रेजी के जमाना हे
एको कन भर आ जाये
ताहन दाई ला डरवाना हे
आज के आधुनिक पढई मे
हमर संस्कार होगे थूल-थूल
का करबे संगवारी
अब गुरुकुल होगे ईसकूल

रचनाकार- ललित साहू "जख्मी"
ग्राम -छुरा
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
9144992879

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