बरखा की पहली बूंद
तीव्र वेग समीर बह चली
रजकण गर्दिश चुमने चली
रजकण गर्दिश चुमने चली
तरु की शाखा हिलने लगी
कुछ तो साथ छोड़ने लगी
कुछ तो साथ छोड़ने लगी
मेघ काले मंडराने लगे
रविकिरण धुंधलाने लगे
रविकिरण धुंधलाने लगे
विहंग कोटरों में दुबक गये
मनुज कोठरी मे छुपक गये
मनुज कोठरी मे छुपक गये
तड़ित की वैभव चमकने लगी
आकाश से शंख गरजने लगी
आकाश से शंख गरजने लगी
धीरे से छन-छन की आवाज कर
बरखा की पहली बुंद
आई मेरे द्वार पर ...
आई मेरे द्वार पर.....
बरखा की पहली बुंद
आई मेरे द्वार पर ...
आई मेरे द्वार पर.....
रचनाकार - हीरालाल गुरुजी''समय"
ग्राम- छुरा जिला-गरियाबंद
ग्राम- छुरा जिला-गरियाबंद
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