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Thursday, 7 July 2016

पढाई
(संदेश कविता)

परीक्षा में पढ़ाई सब करै,
पहले करै न काेय
पहले पढ़ाई सब करै, 
तो फेल काहे को हाेय

विद्या बड़ी न कि दौलत
न कोई और बड़ा हाेय
बाटे तो बढ़ता ही चलै
जो न बाटे सो खाेय

न कोई बुध्दिहीन हैं
न कोई बुध्दिमान
जो जैसे परिश्रम करै,
बनै वैसे ही महान

बेटी है तो कल है
बेटी नाहि तो कल नाहि
बेटी-बेटा को जानो एक
अब कोई गर्भपात नाहि

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दाई-ददा के जतन करव

जियत म दाई-ददा ल 
दाना-दाना बर तरसाये
मरे म तै फोटो ऊपर
अगरबत्ती-दिया जलाये
गये तै मंदिर-मस्जिद
गये तीरथ धाम रे
दाई-ददा के जतन बिना,
व्यर्थ सबो तोर काम रे
झन जा तै मंदिर-मस्जिद,
झन कर तीरथ धाम रे
दाई-ददा म संसार बसे,
बसे ब्रह्मा, विष्णु, महेश, 
अऊ सिता-राम रे
हाँस के पानी-पसिया देदे,
करले मीठा गोठ रे
दाई-ददा ले बड़के दुनिया म,
नइये कोनो रोठ रे
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"मानव जीवन अतिथि समान"

चार दिन का जीवन हैं 
हँसकर सबसे बात कराे
न किसी से द्वेष रखो,
न किसी से बैर करो
किसी के दु:ख पर हँसो नहीं,
न सुख पर विषैला साप बनो
इंसान हो इंसानियत मत भूलो,
सुख-दु:ख का तुम साथ बनो
पैसे को ही लक्ष्य मत समझो,
अब गलत काम का त्याग करो
खाली आये, खाली ही जाना हैं,
न अब तुम भ्रष्टाचार करो
नहीं रहे बल,संपत्तिवाले
तुम भी न अभिमान करो
मानव हो मानव रहो और
सदा मानवता का काम करो

रचनाकार - नेमीचंद साहू
ग्राम - देवगाँव (छुरा)
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)

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