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Saturday, 1 October 2016

स्मरण

सबला एक सूत मा गुंथव
सब अब एकजुट दिखव
हमन बोली भाखा के साथी
हमर सपना हा सलोना हे
चलव आवव ऐ डाहर पाँव धरन
सबो ला ऐके रद्दा मा रेंगवईया
"स्मरण"
अब लिखव अपन मन के बात ला
एक करदव दिन अऊ रात ला
चालू करव अब, ऐ नवा रीति ला
के उजागर करना हे ,सबकुरीति ला
बईठे करके तैयारी,कलम के पुजारी हमन
माँ सरस्वती के आशीष लेवईया
"स्मरण"
सबो झन बर बात ऐ ख़ास रही
नवा करे के ,सबके परयास रही
सबके अन्तस् मा अतका आस रही
सफलता बर सबला बिसवास रही
अपन कद ला जग मा ,अऊ ऊँचास करन
सबला तरक्की के रद्दा देखवईया
"स्मरण"
नई जीना हे, गुमनामी के अंधियार मा
अपन नाव कर जाना हे, ऐ संसार मा
कामयाबी के सितारा,हमरो बर चमकही
सुख के फूलबारी हमरो बर महकही
दिन आही, जब होही हमरो चलन
हमनला हमर खुद के बारे में बतईया
"स्मरण"
नवा किरण अंधियारी ले झांकय
सबो मिलके बैर के ख़ईहाँ ला पाटय
हमर लिखे कागज मा अइसे साजय
पढ़हईया सुनईया ला बने बने लागय
मीठ बोली प्रेम के झरना बरोबर झरन
मीत मितानी सब संग करवईया
"स्मरण"
हमर बोली ,कान मा रस कस हो जाये
घोरे मिसरी,मन्दरस कस हो जाये
सबो चीज बदले बदले कस हो जाये
काम अइसे करन, के हमरो जस हो जाये
अइसे लागे जइसे, होहे नवा अवतरण
सबला संग मा लेके चलवईया
"स्मरण"
                        रचना
              देवेन्द्र कुमार ध्रुव(डीआर)
                 फुटहा करम (बेलर)
             जिला गरियाबंद (छ ग)

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