पावन धरा
धरा के कण-कण में बिखरी,
शोभा सुंदरता खूब निराली।
चहुँ ऒर आकर्षित करती,
नयनों को इसकी हरियाली।
शोभा सुंदरता खूब निराली।
चहुँ ऒर आकर्षित करती,
नयनों को इसकी हरियाली।
गगनचुम्बी मुकुट सा पर्वत,
कल-कल बहती नदियोँ का पानी।
मोर पपीहे कोयल की राग,
कहती इसकी अद्भुत कहानी।
कल-कल बहती नदियोँ का पानी।
मोर पपीहे कोयल की राग,
कहती इसकी अद्भुत कहानी।
ऋषि मुनि जहां करते नित्य,
यज्ञ हवन मंत्रो का जाप।
घुल जाती हवा में जिनके,
सुरस अभिमंत्रित वेदों का आलाप।
यज्ञ हवन मंत्रो का जाप।
घुल जाती हवा में जिनके,
सुरस अभिमंत्रित वेदों का आलाप।
मैदानों में जहां बसी सभ्यता,
विकास की राह गढ़ी है।
संघर्षो से आगे होते,
संस्कृति जीवन तक बढ़ी है।
विकास की राह गढ़ी है।
संघर्षो से आगे होते,
संस्कृति जीवन तक बढ़ी है।
महापुरुषो वीर बलिदानियों का,
अनुपम है उनकी गाथा।
दिल में जिसको दे सम्मान,
नित झुकते सबका माथा।
अनुपम है उनकी गाथा।
दिल में जिसको दे सम्मान,
नित झुकते सबका माथा।
हरी-भरी धरती की गोदी,
मानव इसको क्यों उजाड़ा है।
स्वार्थवस अंधे होकर फिर,
बनाया कारखानो का अखाड़ा है।
मानव इसको क्यों उजाड़ा है।
स्वार्थवस अंधे होकर फिर,
बनाया कारखानो का अखाड़ा है।
उजड़ी बिखरी प्रकृति को,
फिर से हमे सजाना होगा।
कर संकल्प दृढ़ होकर,
धरती को स्वर्ग बनाना होगा।
फिर से हमे सजाना होगा।
कर संकल्प दृढ़ होकर,
धरती को स्वर्ग बनाना होगा।
देवनारायण यदु
पंडरीपानी लोहझर
गरियाबंद 36गढ़
पंडरीपानी लोहझर
गरियाबंद 36गढ़
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