वीर सिपाही
सीने में बारूद भरा,
आँखों में चिंगारी होता है।
मातृभूमि की रक्षा खातिर,
बेख़ौफ़ मौत पर सोता है।
आँखों में चिंगारी होता है।
मातृभूमि की रक्षा खातिर,
बेख़ौफ़ मौत पर सोता है।
तिरंगे का मान सदा,दिलो में जिनके होता है।
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है
प्राणों का जिसको मोह नही,
अमन-शांति का रखवाला है।
सरहद को अपनी जन्नत समझे,
बड़ा ही ओ दिलवाला है।
अमन-शांति का रखवाला है।
सरहद को अपनी जन्नत समझे,
बड़ा ही ओ दिलवाला है।
सबको दे चैन की निद्रा,भले न खुद ओ सोता है।
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है।
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है।
माँ से बड़ी है मातृभूमि,
मिट्टी का कर्ज चुकाता है।
हँसते-हँसते सिमा पर भी,
प्राणों की बाजी लगाता है।
मिट्टी का कर्ज चुकाता है।
हँसते-हँसते सिमा पर भी,
प्राणों की बाजी लगाता है।
मिलता है तिरंगे का कफ़न उसे,बड़ा ही किस्मतवाला होता है।
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है।
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है।
दहाड़ से जिनके आत्म-विश्वास के,
शत्रु रण में टिक न पाते है।
शौर्य और पराक्रम की गाथाएँ जिनके,
दसो दिशाएँ गाते है।
शत्रु रण में टिक न पाते है।
शौर्य और पराक्रम की गाथाएँ जिनके,
दसो दिशाएँ गाते है।
बहादुरी का ओढ़ कवच,दुश्मनो पर भारी होता है।
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है।
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है।
क्यों महक रही मानवता की बगिया,
सोचो इसका क्या कारण है।
जाकर देखो समरभूमि पर,
शहीदों का रक्त इसका उदाहरण है।
सोचो इसका क्या कारण है।
जाकर देखो समरभूमि पर,
शहीदों का रक्त इसका उदाहरण है।
मरकर भी ओ अमर हो जाते,सबके लिए सबक ओ होता है।
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है
कोई नही ओ मेरे वतन का,वीर सिपाही होता है
विनोद यादव
पंडरीपानी लोहझर
गरियाबंद 36गढ़
पंडरीपानी लोहझर
गरियाबंद 36गढ़
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