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Saturday, 1 October 2016

कागज कलम

कलम उठाथन,सबला सोरियाथन
कागज मा अपन भाखा ला सजाथन
सब बर गोठ रहिथे हमर मन करा
लईका होवय चाहे,होवय ओ सियान
हमन तो कहाथन जी कोरा कागज के मितान

कभु परिया परे भुईयाँ,कभु हरियाली
नदिया नरवा के पूरा,अऊ बदरिया कारी
बनके फसल बनके हमन लहलहाथन
किसानी के गोठ गोठियाथन बनके किसान
हमन तो कहाथन जी ........

कभु सबके दुःख दरद के बोली
कभु करथन हमन हांसी ठिठोली
सबके अन्तस् मा समाये के उदीम रथे
जोहारन सबला हाथ जोड़े,माथ नवान
हमन तो कहाथन जी...........

लिखथन सुरुज अऊ चन्दा ला
कमईय्या के सब काम धंधा ला
नवा संदेस देथन जब कलम उठाथन
सब करा हमर आरो पहुँचे देथन धियान
                 रचना
       देवेन्द्र कुमार ध्रुव (डी आर)
            फुटहा करम बेलर
         जिला गरियाबंद (छ ग)

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