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Saturday, 1 October 2016

हुंकार

भारत माँ के वीर सपूत,
सीने पर गोली झेल रहे।
भारत माँ की लाज खातिर,
खून की होली खेल रहे।

हो वीर अदम्य तुम सच्चे पूत,
जो सीने पर वार सहते है।
पीठ पर जो खंजर मारे,
उसे बुज़दिल कायर कहते है।

अपने आप को इंसान कहे,
और इंसानियत को शर्मसार करे।
गर बची हो उसमे थोड़ी सी गैरत,
तो चुल्लु भर पानी में डूब मरे।

ख़ामोशी को ना हमारी कमजोरी समझे,
गर ज़िद पर हम आ जाएंगे।
आँख दिखाने वाले बुज़दिल,
मिट्टी में मिल जाएंगे।

रचना- विनोद यादव
पंडरीपानी लोहझर
जिला-गरियाबंद(छ.ग.)

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