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Saturday, 1 October 2016

सरग असन घर

मोला कोन्हों हा काही बर तरसन नई दिस,
मोर आँखी ले आंसू कभु बरसन नई दिस।
जइसन मांगेव सिरतोन वइसन पायेव मैहा,
दाई-ददा,गुरु,संगवारी सबके मया मिलिस।
      
ददा के दुलरवा गौरी के लाल कहायेंव मैहा,
सरग असन घर म जनम धर के आयेंव मैहा।

मोर पीरा,दाई ला पहिली ले पता चल जाये,
दउड़ के ददा मोला अपन छाती ले लगाये।
जम्मो संगवारी मन घलो मोर काम आये हे,
सुरता हे गुरु मन मोला जेन बात सिखाये हे।

भागमानी हौ सबला अपन तीर पायेव मैहा,
सरग असन घर म जनम धर के आयेंव मैहा।

बदल गे बेरा अब तो मैहर बड़े होगे हंव,
कमाथव खाथव अपन गोड म खड़े होगे हंव।
भले मैहर तो दुनियादारी के फेर म परे हंव,
फेर दाई-ददा के सपना बर कुछु नई करे हंव।

ओकर दूध के करजा ल नई चुकायेंव मैहा,
सरग असन घर म जनम धर के आयेंव मैहा।

मोर अंगरी ला धरके मोला रेंगाये हवय,
अपन आँखी ले मोला दुनिया देखाये हवय।
आज नवा रद्दा बनाके उही मन ला छोड़े हंव,
दुःख पीरा संग उकर मन के नत्ता जोड़े हंव।

सुवारथ बर सबके मन ला दुखायेंव  मैहा,
सरग असन घर म जनम धर के आयेंव मैहा।

मोर जीत बर उकर मन मा आसा राहय,
मैहर पछवाव ता वहू मन ला निरासा राहय।
करेव गलती तभो उकर मीठ भाखा राहय,
एक दिन उकर बर काही करहू केहे रेहेंव।

फेर आजो अपन किरिया नई निभायेंव मैहा,
सरग असन घर म जनम धर के आयेंव मैहा।
                      रचना
         देवेन्द्र कुमार ध्रुव (डी आर )
             फुटहा करम बेलर
          जिला गरियाबंद (छ ग)

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