नवरात्रि मनाबो
कुँवार के सुग्घर महीना आगे,
सबोके मन कइसे हरियागे।
36गढ़ के माटी पावन होगे,
माता के दरश मनभावन होगे।
सबोके मन कइसे हरियागे।
36गढ़ के माटी पावन होगे,
माता के दरश मनभावन होगे।
जुरमिल के चलो जसगीत ल गाबो।
चल संगी नवरात्रि मनाबो।
चल संगी नवरात्रि मनाबो।
नव दिन नव रात ले मइय्या,
दरश ल सबला देथे।
दरश ल सबला देथे।
भगत के लाज रखे बर दाई,
दुःख पीरा ल हरथे।
आसथा बिसवास के जोत ल जगाबो
चल संगी नवरात्रि मनाबो।
चल संगी नवरात्रि मनाबो।
झांझ मंजीरा मांदर बाजे,
गली गांव पारा।
गली गांव पारा।
जुरमिल सबो लगावत हे,
माता के जयकारा।
माता के जयकारा।
चलो संगी मन के मनौती ल पाबो
चल संगी नवरात्रि मनाबो।
चल संगी नवरात्रि मनाबो।
नव दिन के हरे ए सुग्घर तिहार,
मातारानी के हाबे जेमे मया दुलार।
मातारानी के हाबे जेमे मया दुलार।
जग के पाप हरे बर दाई,
आथे होके बघवा म सवार |
संझा बिहनिया माँ के आरती ल गाबो।
चल संगी नवरात्रि मनाबो।
चल संगी नवरात्रि मनाबो।
रचना- विनोद यादव
पंडरीपानी लोहझर (छुरा)
पंडरीपानी लोहझर (छुरा)
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