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Sunday, 21 August 2016

नवा इतिहास

  
आओ जुरियाके भाई,सब आघू बढ़न जी
चलो जुरमिल के नवा इतिहास गढ़न जी ।।

1.
ये भुँइय्या ला तीरथ बना लन
ये माटी के चन्दन लगा लन ।।2
आंच आये नही ...हो 2
जान जाये भला ...आंच ....2
साँस सुनता म करके संग चलन जी ।

2.
उंच -नीच के गड्ढा ला पाटव
भेद - भाव के डिपरा ला खाचव।
इरखा छोड़ो जलन ..हो 2
  प्रेम राखो जतन ...इरखा 2
एक दूसर संग सुग्घर बेवहार करन जी।।

3.
ग्यान, ध्यान ,सनमान बढ़ा लन
जिनगी के हम मोल ला जानन ।।
जिनगी अनमोल हे ...हो 2
  ना एकर तोल हे ...जिनगी 2

अपन जिनगी के संगी सिंगार करन जी।।
चलो जुरमिल के नवा इतिहास गढ़न जी।।

रचना -धनराज साहू बागबाहरा

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