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Sunday, 21 August 2016

कोरा म समा ले

हमन तोर नानकुन लईका,
तैं हरस  हमर  महतारी।
         तैं करेस तियाग अब्बड़,
         हावय अब  हमर पारी।
तोर सरन म खेलेन बाढ़ेन,
अऊ करेन खेती - बारी।
         नई जानेन अपन काम-काज,
         दिन पोहायेन, करके हम चारी।
तैं हा दै वरदान खनिज के,
मर गेन करके हम अलाली।
         दुसरा के हम गोड़ धोयेन,
         भाई बर गेन कोतवाली।
नौकरी करके नौकर बन गेन,
भुला गेन नागर अऊ तुतारी।
         नकल करके अकल गवायेन,
         बेचा गे, घर के लोटा थारी।
तसमा लग गे, चूंदी झर गे,
लग गे फैसन के बिमारी।
         कोई मनखे बाचे नई हे ,
         करे बर ब्यसन अत्याचारी।
कतका ल गिनाव मेहा,
करनी हे मोर बड़ भारी।
         कोरा म समा ले मोला,
         हे छत्तीसगढ़ महतारी।।

ललित साहू "जख्मी" छुरा
जिला -गरियाबंद (छ.ग.)

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