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Saturday, 27 August 2016

धरती दाई के कोरा

धरती दाई के कोरा जी संगी मोर,बड नीक लागे मोला |
मया के बंधना अउ दया के झूलना म,झूलत हे मोर चोला||
चईत महिना रूख-राई ल,नवसिंगार पहिरावय
बईसाख महिना दुलहा-दुलहिन, नवा घरबार सजावय
जेठ महिना बरसे सुरूज,जरे बनकचरा होरा
धरती दाई ............

असाढ महिना गरजे बादर,नवा फसल ह बोवावय
सावन-भादो रोपा-बियासी,खेतखार लहलहावय
ऊसर-पूसर के बरसे बरखा,नदिया-नरवा पूरा
धरती दाई के...........

कुंआर महिना पीतर-पाखी, नवरात जोत जलावय
कातिक महिना दसेरा-देवारी, जगमग दियना जलावय
अघ्घन महिना धान-मिंजई जी, भरगे कोठी-टोला
धरती दाई के .........

पूस महिना जाड जनावय,मांघ म सकरायत जावय
फागून महिना फाग-नगारा, रंग-अबीर उडावय
माते बसंत फूले फूलवारी,झूमें ये मन-भौंरा
धरती दाई के कोरा जी संगी मोर,बड नीक लागे मोला
मया के बंधना अउ दया के झूलना म,झूलत हे मोर चोला |
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रचना:- ललित वर्मा,"अंतर्जश्न"

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