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Sunday, 21 August 2016

दिल के एहसास

जब कोई परंपरा,
दिल से निभाई जाती है।
रित बन जाती है।

जब कोई प्रेम,
दिल मे बसाई जाती है।
प्रीत बन जाती है।

जब कोई धुन,
दिल से गुनगुनाई जाती है।
गीत बन जाती है।

जब कोई वाद्य,
दिल से बजाई जाती है।
संगीत बन जाती है।

जब दिल के एहसास,
कलम की नोंक पर आती है।
वही कविता बन जाती है।।

ललित साहू "जख्मी" छुरा
जिला- गरियाबंद (छत्तीसगढ़)

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