दिल के एहसास
जब कोई परंपरा,
दिल से निभाई जाती है।
रित बन जाती है।
दिल से निभाई जाती है।
रित बन जाती है।
जब कोई प्रेम,
दिल मे बसाई जाती है।
प्रीत बन जाती है।
दिल मे बसाई जाती है।
प्रीत बन जाती है।
जब कोई धुन,
दिल से गुनगुनाई जाती है।
गीत बन जाती है।
दिल से गुनगुनाई जाती है।
गीत बन जाती है।
जब कोई वाद्य,
दिल से बजाई जाती है।
संगीत बन जाती है।
दिल से बजाई जाती है।
संगीत बन जाती है।
जब दिल के एहसास,
कलम की नोंक पर आती है।
वही कविता बन जाती है।।
कलम की नोंक पर आती है।
वही कविता बन जाती है।।
ललित साहू "जख्मी" छुरा
जिला- गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
जिला- गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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