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Saturday, 27 August 2016

हे सिक्छा मईया

हे सिक्छा मईया,तैं बड दुबरागेहस
गियान के देवईया दाई,कईसन छंदागेहस
पहिली बुनियादी सिक्छा,अउ चलिस परीच्छा
फेर आईस एमजीएमएल,अब आरटीई के खेल
सिक्छाविद् के घानी म, गू़ुरूजी-लईका फंदायहे 
अउ तोर दूनो आंखी म, परयोग के फेटा बंधाय हे
गुरूजी-अउ लईका संग,अब तहूं घिलरागेहस
हे सिक्छा मईया.......

मिसन के जमाना हे, संकुलप्रथा आगे हे
सरकारी खजाना म, अधिकारी मन छागे हे
छकत ले खानथे,अउ तरी-ऊपर बांटत हे
अउ खूसूर-फूसूर कहत हे जी, पईसा ह बांचत हे
लईका ह दुच्छा होगे,संग तहूं ह सोंटागेहस
हे सिक्छा मईया ......... 

अंगरेजी ईस्कूल बाढत हे, सरकारी नंदावत हे
नेता एखर पाछू हे,मनचाहा कान्हून बनावत हे
जे ऊप्पर ले बने दिखथे,अउ भीतर ले घूनावत हे
अब गुरूजी घलो संग देवत हे, कागजी घोडा दऊडावत हे
पालक घलो सुते हे,तैं करजूग ल काबर लादेहस
हे सिक्छा मईया ........

आरटीई के जमाना हे,फेल नई करना हे
मारपीट गारी बंद हे, खेल-खेल म पढना हे
कोन्हों लईका मूंहजोरी करथे, कोन्हों मुडी म चढत हे
लईका मन ह का पढही जी, अब गुरूजी ह पढत हे
मंझनिया जेवन जम्मो खात हे, अउ तहूं हर भूखागेहस
हे धरती मईया, तैं बड दुबरागेहस
गियान के देवईया दाई, कईसन छंदागेहस
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रचना:- ललित वर्मा,"अंतर्जश्न" 

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