बरखा की पहली बूंद
तीव्र वेग समीर बह चली,
रजकण गर्दिश चुमने चली।
रजकण गर्दिश चुमने चली।
तरु की शाखा हिलने लगी,
कुछ तो साथ छोड़ने लगी।
कुछ तो साथ छोड़ने लगी।
मेघ काले मंडराने लगे,
रवि किरण धुंधलाने लगे।
रवि किरण धुंधलाने लगे।
विहंग कोठरों में दुबक गये,
मनुज कोठरी मे छुपक गये।
मनुज कोठरी मे छुपक गये।
तड़ित की वैभव चमक उठी,
आकाशवाणी की शंखनाद उठी।
आकाशवाणी की शंखनाद उठी।
धीरे से छन-छन की आवाज कर,
बरखा की पहली बुंद,
आई मेरे द्वार पर ।
आई मेरे द्वार पर।
बरखा की पहली बुंद,
आई मेरे द्वार पर ।
आई मेरे द्वार पर।
हीरालाल गुरुजी ''समय"
छुरा-गरियाबंद
छुरा-गरियाबंद
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