अवईया हावे तीजा-पोरा
उत्ता - धुर्रा चलावत हावे, कुम्हार अपन चाक,
बड़ जल्दी अवईया हावे, तीजा-पोरा के पाख।
बड़ जल्दी अवईया हावे, तीजा-पोरा के पाख।
कन्हार के माटी ल, बड़ सुग्घर सिरजावत हे,
रंग - बिरंगी नाद - बईला मनमाने बनावत हे।
रंग - बिरंगी नाद - बईला मनमाने बनावत हे।
पको डरे हे तिकर मन के, उघारत हे आंखी,
गुलाबी, लाल, सोनहा रंग ल पोतत हे काकी।
गुलाबी, लाल, सोनहा रंग ल पोतत हे काकी।
नानुक चुल्हा, नानुक बटलोही झारा बनाय हे,
बाल्टी, कढ़ई, तावा मे डंठल घलो धराय हे।
बाल्टी, कढ़ई, तावा मे डंठल घलो धराय हे।
लईका रिझाये बर, गैस सिलेंडर घलो बनाय हे,
नाद-बईला के चक्का ल, रोंठ - रोंठ बनाय हे।
नाद-बईला के चक्का ल, रोंठ - रोंठ बनाय हे।
बईला गाड़ी म भर के, बेचे बर हाट जावत हे,
लेवईया आवत नई हे, बपूरा बईठे उंघावत हे।
लेवईया आवत नई हे, बपूरा बईठे उंघावत हे।
तिहार ल दिन हे कहिके, कुम्हार आस लगाये हे,
फेर हमर संस्कृति बर परदेसिया घात लगाये हे।
फेर हमर संस्कृति बर परदेसिया घात लगाये हे।
अपन ल भुला के, पश्चिमी संस्कृति अपनावत हे,
सबो तिहार ल घर बईठे, मोबाइल म मनावत हे।
सबो तिहार ल घर बईठे, मोबाइल म मनावत हे।
खेत-खार, तरिया-ड़बरा मसीन म खनावत हे,
गांव-गांव ले सिरतोन म, बईला हा नंदावत हे।
गांव-गांव ले सिरतोन म, बईला हा नंदावत हे।
पलासटिक खिलौना हाट मे, आगे आनी-बानी,
कुम्हार के परवार बर कहां ले आये दाना-पानी।
कुम्हार के परवार बर कहां ले आये दाना-पानी।
ललित साहू "जख्मी" छुरा
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
No comments:
Post a Comment