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Saturday, 27 August 2016

अच्छा दिन आवत हे

खेत परिया परे हे,
दाई मुड़ ल धरे हे,
सुत उठ के बड़े बिहनिया,
टूरा भट्ठी जावत हे।
अच्छा दिन आवत हे...।

खेत खार ल बेच के ददा ,
टूरा ल पढ़ावत हे,
पढ़ई लिखई ल छोड़ के टूरा,
दिन भर गाड़ी दउड़ावत हे।
अच्छा दिन आवत हे...।

टूरा के जइसन तइसन होही,
टूरी संसो म डारत हे,
कोन जनी कोन पइसा भरात हे,
रातदिन मोबा म गोठियावत हे।
अच्छा दिन आवत हे...।

डीजे डांस के चर्चा हे,
नाचा गम्मत म बड़ खर्चा हे,
अइसन सोंच अऊ गोठ के सेती,
नाचा लील्ला नंदावत हे।
अच्छा दिन आवत हे...।

छत्तीसगढ़िया जिहां के तिहां रहिगे,
परदेशिया मन अघुवावत हे।
हमरे बाना ल मारके,
हमीं ल टुहूं देखावत हे।
अच्छा दिन आवत हे...।

दार के भाव टिलींग म चढ़गे,
गोंदली ह रोवावत हे।
एक रुपया किलो के चांउर ल मंगलू,
नून मिरचा संग खावत हे।
अच्छा दिन आवत हे...।

रचना - रीझे यादव, ग्राम - टेंगनाबासा (छुरा)

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