बात लागे न बानी
अरे बात लागे ना बानी
काकर कंहाव कहानी ।।
काकर कंहाव कहानी ।।
दुःख पाय ,छेवारी सही ,
सरी-सरी रात हे
सुक्खा हावय हड़िया-तउलिया
बासी हे न भात हे ....
मोरत धज के राज म,नइये कोनो दानी ।।...अरे बात लागे..
सरी-सरी रात हे
सुक्खा हावय हड़िया-तउलिया
बासी हे न भात हे ....
मोरत धज के राज म,नइये कोनो दानी ।।...अरे बात लागे..
बड़का -बड़का ,बिल्डिंग मन में
भारी मन्थन होवत हे ...
कागद -पतरा,सियाही मन में
किसानी ला बोवत हे ...
बैठांगुर मन राज करत हे ,खंतिहा करे किसानी ...।। अरे बात लागे...
भारी मन्थन होवत हे ...
कागद -पतरा,सियाही मन में
किसानी ला बोवत हे ...
बैठांगुर मन राज करत हे ,खंतिहा करे किसानी ...।। अरे बात लागे...
काहर -माहर ,धान ममहावे
पछीना म नहाये हन ...
मिहनत के हम अतर छीत के
अन ला उपजाये हन ...
सोसन ,अईताचार दुनो के होवत हे मितानी ...।।अरे बात लागे ....
पछीना म नहाये हन ...
मिहनत के हम अतर छीत के
अन ला उपजाये हन ...
सोसन ,अईताचार दुनो के होवत हे मितानी ...।।अरे बात लागे ....
थूंक म लाडू ,बांधत हावय
पाग घलो छरीयावत हे
वहू लाडू ल ,खुदे खांत हे
हम ल टूहूँ देखावत हे ....
दूध -दही ह नोहर होगे ,उंकर घर दुहानि ....।। अरे बात लागे न
पाग घलो छरीयावत हे
वहू लाडू ल ,खुदे खांत हे
हम ल टूहूँ देखावत हे ....
दूध -दही ह नोहर होगे ,उंकर घर दुहानि ....।। अरे बात लागे न
हमरो गलती कमती नइये
जुलुम सहिना ,पाप हे
कोंन जनी कब बुध हा आही
अपनेच्च्च मन सब साँप हे ...
अपने मन हा चाबत हावय,मांग सकस नई पानी ...।।अरे बात लागे ...
जुलुम सहिना ,पाप हे
कोंन जनी कब बुध हा आही
अपनेच्च्च मन सब साँप हे ...
अपने मन हा चाबत हावय,मांग सकस नई पानी ...।।अरे बात लागे ...
रचना -धनराज साहू बागबाहरा
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