" जीवन साकार बना लो "
है अगर लेखनी मे धार तुम्हारे
शब्दों को अपनी तलवार बना लो
करो परिवर्तन जग मुंह ताक रहा
काव्य स्वरों को ही हुंकार बना लो
शब्दों को अपनी तलवार बना लो
करो परिवर्तन जग मुंह ताक रहा
काव्य स्वरों को ही हुंकार बना लो
दो प्रेरणा समरसता की सबको
क्रोध, घमंड का छोटा आकार बना लो
वैमनस्य त्यागो और त्यागो भेदभाव
संपूर्ण जगत को अपना परिवार बना लो
क्रोध, घमंड का छोटा आकार बना लो
वैमनस्य त्यागो और त्यागो भेदभाव
संपूर्ण जगत को अपना परिवार बना लो
गुरु चरणों मे करो वन्दना नित प्रति
जन्म धरती पर अपना साकार बना लो
मात - पिता के तुम ऋणि युगों तक
अपना धर्म तुम उनका सत्कार बना लो
जन्म धरती पर अपना साकार बना लो
मात - पिता के तुम ऋणि युगों तक
अपना धर्म तुम उनका सत्कार बना लो
सब सीखो यशस्वी बुजुर्गों से और
जीवन का ध्येय परोपकार बना लो
रहो मझधार सदैव भक्ति सागर के
संस्कारों को ही जीवन आधार बना लो
जीवन का ध्येय परोपकार बना लो
रहो मझधार सदैव भक्ति सागर के
संस्कारों को ही जीवन आधार बना लो
रखो पावन सदैव अपना चंचल मन
निशक्तों की सेवा का विचार बना लो
हो जब जरुरत तुम्हारी जन्मभूमि को
तुम अविलंब ही लंबी कतार बना लो
निशक्तों की सेवा का विचार बना लो
हो जब जरुरत तुम्हारी जन्मभूमि को
तुम अविलंब ही लंबी कतार बना लो
अखंड भारत की प्रचंड ज्वाला भर मन मे
गगन भेदी शांति का मिनार बना लो
ना हो प्रहार जननी, भगिनी, निर्बल पर
खुद को तुम मजबूत ऐसी दीवार बना लो
गगन भेदी शांति का मिनार बना लो
ना हो प्रहार जननी, भगिनी, निर्बल पर
खुद को तुम मजबूत ऐसी दीवार बना लो
ना हो लज्जित दग्ध मातृभूमि का
युयुत्सु पर खुद को अंगार बना लो
अगर धरो सहस्त्र जन्म इस धरा पर
तिरंगे को ही अंतिम श्रृंगार बना लो
युयुत्सु पर खुद को अंगार बना लो
अगर धरो सहस्त्र जन्म इस धरा पर
तिरंगे को ही अंतिम श्रृंगार बना लो
ललित साहू "जख्मी"ग्राम - छुरा
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
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