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Monday, 25 July 2016

सरकार

मुक्तक -
" कइसे ये सरकार हे जी
     कइसे ये सरकार ...म
जनता के जो काम न आये ,
समझो हे बेकार ......।।"
कइसे होगे रे सरकार
   जे आथे .....होथे लचार...
       देखो का होही ....२

भूख ,गरीबी ,मंहगाई म
सोन चिरईया ,फंदागे हे ।
रक्छा करईया सुरसा होगिन,
  मानवता हा,नंदागे हे ।।
संसद होगे ,तारे -तार ...
  संत्री -मंत्री ,दागदार ...सोचो का होही

नीति -नियम के,सोर नइये ..
  मन -मरजी ,चलात हे ।
जेहर पाथे ,तेहर दुहथे ...
   धारे - धार बोहात हे ...।।
जिहा जनता हे बीमार ...
  जिहा भरे परे गद्दार ...सोचो का होही ।।

फोकटाहा माल ,खवैया होगिन
  मिहनत ले जी चुरात हे ...।
मंद -मऊहा के फेर म परके,
  खेत -खार हा बेचात हे ...।।
राईट होगे हे मतवार ....
   घर के होगे ,बंटाधार ...सोचो का होही ।।

कोंन हा आही ,किसना बनके
   दुस्ट कंस ल मारे बर ...।
कोंन ह बनही राम इंहा के ..
   दुखी प्रजा ल तारे बर ...।।
जिहा सोच म बेभिचार ....
   नइये कोनो ल दरकार ...
देखो का होही ...सोचो का होही..।।

रचना -धनराज साहू 
बागबाहरा

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