गजल
कोई बता भी दे हमें
क्यों ओ नज़र खामोश हैं
शिकवा करें भी किस तरह
कबसे बह़र खामोश हैं
क्यों ओ नज़र खामोश हैं
शिकवा करें भी किस तरह
कबसे बह़र खामोश हैं
कोई दिखा दे राह भी
सारे ड़गर खामोश हैं
हम आ गये मंजिल-ए-इश्क
तब ये शह़र खामोश हैं
सारे ड़गर खामोश हैं
हम आ गये मंजिल-ए-इश्क
तब ये शह़र खामोश हैं
कोई लगा दे पार अब
देखो लह़र खामोश हैं
है मौत की जरुरत जख्मी
तब ये जह़र खामोश हैं
देखो लह़र खामोश हैं
है मौत की जरुरत जख्मी
तब ये जह़र खामोश हैं
रचनाकार - ललित साहू
ग्राम -छुरा
ग्राम -छुरा
जिला- गरियाबंद
No comments:
Post a Comment