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Thursday, 7 July 2016

गजल

कोई बता भी दे हमें
क्यों ओ नज़र खामोश हैं
शिकवा करें भी किस तरह
कबसे बह़र खामोश हैं

कोई दिखा दे राह भी
सारे ड़गर खामोश हैं
हम आ गये मंजिल-ए-इश्क
तब ये शह़र खामोश हैं

कोई लगा दे पार अब
देखो लह़र खामोश हैं
है मौत की जरुरत जख्मी
तब ये जह़र खामोश हैं

रचनाकार - ललित साहू
ग्राम -छुरा
जिला- गरियाबंद 

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