hindi

Monday, 25 July 2016

मोर चाहना

अमन-सान्ति के बिरवा बोवईया बर
लोटा-चरू बन जातेंव |
मानवता के रद्दा चलईया बर
कल्प-तरू बन जातेंव ||

नारी-जाति के सेवा करईया
खोजत हंव ईनसान ल भईया
दाई-ददा के पीरा हरईया
सरवन जईसे महान ल भईया
अईसन के भवपार करेबर--२
नईया-हरू बन जातेंव
मानवता के ........

आज धरम के ठेका लेवईया के
बाढे हे गरब-गुमान जी भईया
स्वारथ म सब बूडे हाबय
गियान ले हे अनजान जी भईया
अईसन भोगी-ढोंगी मनबर--२
करेला-करू बन जातेंव
मानवता के.......

देस के रक्छा करथे बेटा
जाड-घाम घलो झेलथे बेटा
हमर सुख-चैन के खातिर
लडथे-मारथे-मरथे बेटा
अईसन सैनिक परवार बर--२
पीरा-हरू बन जातेंव
मानवता के ..........

आज देस ल लूटथे नेता
गांव-गरीब ल चूसथे नेता
कानून आंखी म डारे हे फेटा
मजा करथे जी पापी के बेटा
अईसन घूना-माहू मनबर--२
जहूर-करू बन जातेंव
मानवता के..........

कलजूग के जी छागेहे बादर
अंतस म भरे काजरे-काजर
छल-कपट के बाजथे मांदर
नाचथे-गावथे पाप के गागर
अईसन जनबर जम सही मैं--२
सजा-करू बन जातेंव
मानवता के .......

जब महामारी के परही चपेटा
त्राहि-त्राहि करही माटी के बेटा
रूख-राई अउ चिरई-चुरगूल
गाय-गरू घलो आही लपेटा
अईसन म मैं पीरा हरईया--२
दवा-दारू बन जातेंव
मानवता के ...........

अमन-सान्ति के बिरवा बोवईया बर
लोटा-चरू बन जातेंव |
मानवता के संग चलईया बर
कल्प-तरू बन जातेंव ||

         रचना:- ललित वर्मा,छुरा 

No comments:

Post a Comment