मोर चाहना
अमन-सान्ति के बिरवा बोवईया बर
लोटा-चरू बन जातेंव |
मानवता के रद्दा चलईया बर
कल्प-तरू बन जातेंव ||
लोटा-चरू बन जातेंव |
मानवता के रद्दा चलईया बर
कल्प-तरू बन जातेंव ||
नारी-जाति के सेवा करईया
खोजत हंव ईनसान ल भईया
दाई-ददा के पीरा हरईया
सरवन जईसे महान ल भईया
अईसन के भवपार करेबर--२
नईया-हरू बन जातेंव
मानवता के ........
खोजत हंव ईनसान ल भईया
दाई-ददा के पीरा हरईया
सरवन जईसे महान ल भईया
अईसन के भवपार करेबर--२
नईया-हरू बन जातेंव
मानवता के ........
आज धरम के ठेका लेवईया के
बाढे हे गरब-गुमान जी भईया
स्वारथ म सब बूडे हाबय
गियान ले हे अनजान जी भईया
अईसन भोगी-ढोंगी मनबर--२
करेला-करू बन जातेंव
मानवता के.......
बाढे हे गरब-गुमान जी भईया
स्वारथ म सब बूडे हाबय
गियान ले हे अनजान जी भईया
अईसन भोगी-ढोंगी मनबर--२
करेला-करू बन जातेंव
मानवता के.......
देस के रक्छा करथे बेटा
जाड-घाम घलो झेलथे बेटा
हमर सुख-चैन के खातिर
लडथे-मारथे-मरथे बेटा
अईसन सैनिक परवार बर--२
पीरा-हरू बन जातेंव
मानवता के ..........
जाड-घाम घलो झेलथे बेटा
हमर सुख-चैन के खातिर
लडथे-मारथे-मरथे बेटा
अईसन सैनिक परवार बर--२
पीरा-हरू बन जातेंव
मानवता के ..........
आज देस ल लूटथे नेता
गांव-गरीब ल चूसथे नेता
कानून आंखी म डारे हे फेटा
मजा करथे जी पापी के बेटा
अईसन घूना-माहू मनबर--२
जहूर-करू बन जातेंव
मानवता के..........
गांव-गरीब ल चूसथे नेता
कानून आंखी म डारे हे फेटा
मजा करथे जी पापी के बेटा
अईसन घूना-माहू मनबर--२
जहूर-करू बन जातेंव
मानवता के..........
कलजूग के जी छागेहे बादर
अंतस म भरे काजरे-काजर
छल-कपट के बाजथे मांदर
नाचथे-गावथे पाप के गागर
अईसन जनबर जम सही मैं--२
सजा-करू बन जातेंव
मानवता के .......
जब महामारी के परही चपेटा
त्राहि-त्राहि करही माटी के बेटा
रूख-राई अउ चिरई-चुरगूल
गाय-गरू घलो आही लपेटा
अईसन म मैं पीरा हरईया--२
दवा-दारू बन जातेंव
मानवता के ...........
त्राहि-त्राहि करही माटी के बेटा
रूख-राई अउ चिरई-चुरगूल
गाय-गरू घलो आही लपेटा
अईसन म मैं पीरा हरईया--२
दवा-दारू बन जातेंव
मानवता के ...........
अमन-सान्ति के बिरवा बोवईया बर
लोटा-चरू बन जातेंव |
मानवता के संग चलईया बर
कल्प-तरू बन जातेंव ||
लोटा-चरू बन जातेंव |
मानवता के संग चलईया बर
कल्प-तरू बन जातेंव ||
रचना:- ललित वर्मा,छुरा
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