"का इही हमर गांव हे "
उघरा परे संस्कीरति
उजरे परे ठाँव हे ।
देख तो भाई मंगलू का इही हमर गाँव हे ।।..२
कँहा गे रे भाई ..
वो बर रुख के छाँव हा ,
भांय -भांय लागत हे
मोर मयारू गाँव हा ..२
सोनहा बिहान जिन्हा २लछमी के पाँव हे ....देख तो भाई ....
वो बर रुख के छाँव हा ,
भांय -भांय लागत हे
मोर मयारू गाँव हा ..२
सोनहा बिहान जिन्हा २लछमी के पाँव हे ....देख तो भाई ....
सुरता हा आवत हे
ननपन के संगी
हांसी -खुसी जिनगी चले
रहय कतको तंगी ।।...२
सबो जिनिस होगे हे २ तभो हाँव -हांव हे ....देख तो भाई मंगलू....
ननपन के संगी
हांसी -खुसी जिनगी चले
रहय कतको तंगी ।।...२
सबो जिनिस होगे हे २ तभो हाँव -हांव हे ....देख तो भाई मंगलू....
एक महीना आगू
नंगारा ह बाजे
लइका -सियान जम्मों
गुड़ी भीतरी नांचे ।।...२
परे हे नंगारा बाजे ..२ डीजे काँव काँव हे ...देख तो भाई ....
नंगारा ह बाजे
लइका -सियान जम्मों
गुड़ी भीतरी नांचे ।।...२
परे हे नंगारा बाजे ..२ डीजे काँव काँव हे ...देख तो भाई ....
डंडा -रहस खोर गली में
जेती-देखो तेती
संउहत बिरीज लागे
गाँव चारो कोती ।।...२
गाय -गरु ,दूध -दही नइये २ भाठी म पाँव हे ...देख तो भाई....
जेती-देखो तेती
संउहत बिरीज लागे
गाँव चारो कोती ।।...२
गाय -गरु ,दूध -दही नइये २ भाठी म पाँव हे ...देख तो भाई....
का ठेठरी, का खुरमी
अईरसा हे राजा ,
मीठ नूनछुर ,आनी - बानी
रंग -रंग के खाजा ।।...२
मुहु मन म पानी आवय...२ लागे खांव -खांव हे।।...देख तो भाई...
अईरसा हे राजा ,
मीठ नूनछुर ,आनी - बानी
रंग -रंग के खाजा ।।...२
मुहु मन म पानी आवय...२ लागे खांव -खांव हे।।...देख तो भाई...
संगी जहुंरिया के,
हांसी -ठिठोली
रस घोरे भौजी के
बानी मीठ बोली ।।...२
सरग सही लागे गाँव २ उल्टा परे दांव हे ।।....देख तो भाई ....
हांसी -ठिठोली
रस घोरे भौजी के
बानी मीठ बोली ।।...२
सरग सही लागे गाँव २ उल्टा परे दांव हे ।।....देख तो भाई ....
चार -तेंदु ,आमा मौरे
लट-झूमर लागे
परसा के फ़ुलवा के
रँग सूंदर लागे ।।२....
रुखराई ,ठुठवा परे..२ जंगल बस नाँव हे ।।..देख तो भाई....
लट-झूमर लागे
परसा के फ़ुलवा के
रँग सूंदर लागे ।।२....
रुखराई ,ठुठवा परे..२ जंगल बस नाँव हे ।।..देख तो भाई....
गाँव भर म ,नता होवे
बबा ,कका, काकी
सुख -दुख म खड़ा होवें
उही हमर साथी ..।।
भाई चारा बख्ठी परे...२इरखा भारी पाँव हे।।
बबा ,कका, काकी
सुख -दुख म खड़ा होवें
उही हमर साथी ..।।
भाई चारा बख्ठी परे...२इरखा भारी पाँव हे।।
देख तो भाई ....
रचना -धनराज साहू
बागबाहरा
बागबाहरा
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