"चिन्ता"
परिंदा दाने की चिंता नहीं करता
अजगर खाने की चिंता नहीं करता
कौआ ताने की चिंता नहीं करता
कोयल गाने की चिंता नहीं करता
अजगर खाने की चिंता नहीं करता
कौआ ताने की चिंता नहीं करता
कोयल गाने की चिंता नहीं करता
कुत्ता मालिक की चिंता नहीं करता
खर कालिख की चिंता नहीं करता
खर कालिख की चिंता नहीं करता
भेड़ बाल की चिंता नहीं करता
घोड़ा चाल की चिंता नहीं करता
घोड़ा चाल की चिंता नहीं करता
बकरा खाल की चिंता नहीं करता
बंदर डाल की चिंता नहीं करता
बंदर डाल की चिंता नहीं करता
चींटी फल की चिंता नहीं करती
मुर्गी कल की चिंता नहीं करती
मुर्गी कल की चिंता नहीं करती
हाथी बल की चिंता नहीं करता
मीन जल की चिंता नहीं करता
मीन जल की चिंता नहीं करता
शेर दल की चिंता नहीं करता
सियार छल की चिंता नहीं करता
सियार छल की चिंता नहीं करता
मानव तू ऐसा क्यों है
जो दाने-खाने,कल -बल, दल-छल,
जल -कल, बाल- खाल ,तन- धन,
सब की चिंता करता है
जो दाने-खाने,कल -बल, दल-छल,
जल -कल, बाल- खाल ,तन- धन,
सब की चिंता करता है
जबकि तू जानता है
चिंता चिता तक पहुचाती है
चिंता चिता तक पहुचाती है
हीरालाल गुरूजी"समय"
ग्राम-छुरा , गरियाबंद
ग्राम-छुरा , गरियाबंद
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