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Sunday, 17 July 2016

वीर शहीद मन ला नमन


शांति के साँस बर ....
निकले हे जवान ,
   पैडगरी रसता ...
     उबड़-खाबड़ ,बंजर माटी ।।

दिन देखे ,न रात
बस हमन ल
  चैन से सुते , घुमे खातिर ...
अपन जिनगी ला
  दांव म लगाये हे  ।।

मरे बर घलो ..
खुसी -खुसी ,बिदा लेथे ..
अउ हमन ...
माते हन ....गुला -झांझरी म ...
   खींचतान म ....

ओमन सांस के मोल
  जानत हे ....
अउ हमन बेचत हन ...
   सांस ला ......

हमर सांस ल
  बचात हे .....
खुद के सांस ल 
   रोक के .......

हमन टी बी ,देखथन..
  पेपर पढ़थन ..
    रोज बिहनिया...
लाल -लाल देखथन
  लाल -लाल ,पढ़थन ....

संझा ....चहा पीयत
  बहस करथन ....
अउ रात के .......
   लॉफ्टर चैंनल देखके ...
बिहनिया ..सरधाञ्जलि देथन
  राजकीय सोक मनाथन ...
अउ फेर तियारी करथन ...
  एक ठीन ...साँस के ...
                     जोरा के

रचना -धनराज साहू बागबाहरा

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