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Monday, 25 July 2016

किसानी के पीरा

अब बिजहा घलो सिरा गे हे मितान
अईसन म परही अकाल त का होही
ब्यासी के दिन म भूंजावत हे धान
अब किसान अउ कंगाल का होही

दाई के आंखी घलो अब दिखे नही
तिही बता मितान मोर हाल का होही
बईला मर गे पैरा जर गे घर उजर गे
ऐखर ले ज्यादा हाल बेहाल का होही

खेत बोंआ गे बन निंदा गे दवई छिता गे
फेर ठाढ़ सुखा खेत म फसल का होही
धान तो हो जही फेर उधारी के पुरतिन
मोर बाढ़े नोनी के बिहाव अब का होही

लईका असन धान ल सहेज के राखेंव
अऊ खरही रचेंव लान के घर दुवारी मे
बरसे के दिन म नई बरसिस बैरी बादर
बैरी अब अंधियारे हे अब मिंजई का होही

तोपेंव तभो ले पानी पा के धान करिया गे
गाड़ी लहूट गे मंड़ी ले सरकारी मगजमारी मे
अब तो बोनस के आस घलो नई हे मितान
अईसन म करजा छोंड़ तेल नून के का होही

बियाज के अऊ बियाज जुड़त हावय
हम तो मर गेन साहूकार के मक्कारी मे
अऊ सरकार चूप तमासा देखत हावय
येखर ले ज्यादा अंतस अऊ का रोही

टूरा ल पढ़ायेंव पुरखवती खेत बेच के
अब उही टूरा खेत जाय बर लजावत हे
अब तिही सोंच अऊ तिही बता मितान
अईसन मे हमर देस के हाल का होही

ललित साहू "जख्मी" ग्राम- छुरा
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)

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