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Thursday, 7 July 2016

" मेरा बेटा जवान हो रहा है "

 ( व्यंग्य )

सब चलाते हैं
वो भी चलाता है
वाहन की रफ्तार से
बड़े करतब दिखाता है
कभी वो भी पिलाते होंगें
कभी ये भी पिलाता है
मौत के धुएँ को भी
खुबसुरत छल्ला बनाता है
संस्कार लगते उसे ढकोसले
पैसा ही भगवान हो रहा है
देख भाई
मेरा बेटा जवान हो रहा है

प्रेम लीला ना करे
तो क्या करे इस उम्र मे
सजा भला क्या दूं
बिना सबूत के जुर्म मे
अब वो दिन गये पुराने
जब उम्र बिता देते थे सब्र मे
कहो तो उल्टा सुनना पड़ेगा
कि अब तुम्हारे पांव है कब्र मे
कड़वी जुबां लिये छू रहा बुलंदी
ये देख जमाना हैरान हो रहा है
देख भाई
मेरा बेटा जवान हो रहा है

दांव पर जिन्दगी
जिन्दगी पर घाव लगाता है
सुख छाँव प्रेमिका पत्नी को
और माँ को आघात लगाता है
बहन की लाज बचाता नहीं
पर कृष्ण कन्हैया कहलाता है
रिश्ते, परंपरा, शिष्टाचार गौण
आधुनिकता में मन लगाता है
फिजूल ही कहते हैं लोग
कि मेरा सपूत शैतान हो रहा है
देख भाई
मेरा बेटा जवान हो रहा है

ललित साहू "जख्मी" ग्राम - छुरा
जिला - गरियाबंद (छ.ग.)
9144992879

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