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Thursday, 7 July 2016

"मै भी लिखूं"

बहर -रजज 2212×4

मैं सोचता हूँ यूँ सभी बातें असल मैं भी लिखूँ ।
मैं सोचता हूँ आज ही अपनी गजल मैं भी लिखूँ ।।

थामा कलम जब हाथ में मैंने नई ताकत मिली ।
मैं सोचता हूँ अब इसी को ही सबल मैं भी लिखूँ ।।

वो जो कदम मेरा उठा था इस सफर आगाज में ।
मैं सोचता हूँ अब उसे मेरी पहल मैं भी लिखूँ ।।

मैं जो कहूं आसान हो वो बात सब समझे जिसे ।
मैं सोचता हूँ गीत अब ऐसे सरल मैं भी लिखूँ ।।

मैं चाहता हूँ जीतना अब जीत ही आगे मिले ।
जो आपने माना अभी तो हूँ सफल मैं भी लिखूँ ।।

              देवेन्द्र कुमार ध्रुव (डीआर)
                  फुटहा करम बेलर
                   जिला गरियाबंद

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