"मै भी लिखूं"
बहर -रजज 2212×4
मैं सोचता हूँ यूँ सभी बातें असल मैं भी लिखूँ ।
मैं सोचता हूँ आज ही अपनी गजल मैं भी लिखूँ ।।
मैं सोचता हूँ आज ही अपनी गजल मैं भी लिखूँ ।।
थामा कलम जब हाथ में मैंने नई ताकत मिली ।
मैं सोचता हूँ अब इसी को ही सबल मैं भी लिखूँ ।।
मैं सोचता हूँ अब इसी को ही सबल मैं भी लिखूँ ।।
वो जो कदम मेरा उठा था इस सफर आगाज में ।
मैं सोचता हूँ अब उसे मेरी पहल मैं भी लिखूँ ।।
मैं सोचता हूँ अब उसे मेरी पहल मैं भी लिखूँ ।।
मैं जो कहूं आसान हो वो बात सब समझे जिसे ।
मैं सोचता हूँ गीत अब ऐसे सरल मैं भी लिखूँ ।।
मैं सोचता हूँ गीत अब ऐसे सरल मैं भी लिखूँ ।।
मैं चाहता हूँ जीतना अब जीत ही आगे मिले ।
जो आपने माना अभी तो हूँ सफल मैं भी लिखूँ ।।
जो आपने माना अभी तो हूँ सफल मैं भी लिखूँ ।।
देवेन्द्र कुमार ध्रुव (डीआर)
फुटहा करम बेलर
जिला गरियाबंद
फुटहा करम बेलर
जिला गरियाबंद
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